Sushant Singh Rajput-Poem| Best poem on SSR| RIP SSR Poems


    Sushant Singh Rajput-Poem    

Sushant Singh Rajput-Poem   

  ऐसे भी कोई जाता है सुशांत

-अमित सिंह चंदेल-

क्या तुमने एक बार भी ना सोचा होगा

कि दुनिया तुम्हें कायर कहेगी

तुम्हें बेवकूफ़ या समझदार कहेगी                

कितने  अनसुलझे सवाल

पीछे छोड़ गए होगे

बे दर्द जमाने की सच्चाई

बयान कर गए होगे

दिल जला कर जिस्म से

धुआँ पैदा किया होगा

जल रहा था जिस्म तब

बाकी बचा क्या होगा

अश्क बहाने का निर्णय अपनी खाक पर

तुमने कैसे लिया होगा

इस पार जिंदगी बड़ी थी अशांत

तो उस पार जिंदगी क्या देखी सुशांत

तुम दोषी नहीं थे दुनिया जानती थी

तो क्यों चुपचाप गए अपनी उलझन के साथ

तुम अकेले थे अकेले ही चले गए

अपनी धड़कन के साथ

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तुम जीवन में कुछ भी कर सकते थे

क्या सिर्फ मौत को ना टाल सकते थे

इतना भी क्या दर्द जो कम न होता

सिर्फ ईश्वर का ही आसरा जो करते

जख्मों को तुम अपनों से न छुपाते

घड़ी दो घड़ी उनसे मिलकर तो देखते

हरे जिनके जख्म हैं उन्हें भी तो देखते

अंधेरी रात में सितारों को  देखते

मंझधार में भी किनारा तो देखते

तुम क्यों खामोश रहे हरदम इंसानों से डरे

हम तो बंधे हैं आज भी प्यार के बंधन में तेरे

काश ! हम देख पाते इस जीवन के पार

काश ! हम जान पाते

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हंसी के पीछे कोरों में छिपी नमी को

देख पाते अंतर्मन में रिसते घावों को

तुम बेवक्त ऐसे न जाते

यदि  हमने अकेला छोड़ा न होता

तुम्हें गले लगाया होता

तुम्हें बताया होता कि

हम तुमसे कितना प्यार करते हैं

तुम्हारी अस्ति के क्या मायने हैं

सब कुछ पाना ही जिंदगी नहीं है

एक कोशिश हमारी भी होती तो

जख्म जिगर के इतने गहरे न होते

कैसी मनहूस घड़ी रही होगी

जब तुम अपनी जिद पर अड़े होगे

दुनिया की बेरुखी के भंवर में फंसकर

तुम खुद से कितना लड़े होगे

क्षण मात्र में होश खोकर जब

मौत‌ को गले लगाया होगा

क्या मां बाबू बहन मित्रों के बारे में

कुछ भी न‌ सोचा होगा

क्यों इतनी खूबसूरत दुनिया तुम्हें  

 बीरान‌ लगी होगी

बंद कमरे में कर खुद को अकेला

 घुप्प अंधेरे की चादर ओढ़ी होगी

हमदर्द न जब मिला कोई होगा

 घंटों बैठ एकांत खूब रोया होगा

Sushant Singh Rajput-Poem

काश ! तुम्हें कोई समझा पाता

नर्म दिल‌ की अकुलाहट जान पाता

उदासी की पलकें जो खोल देते तुम

तो मुस्कुराते हुए लौट आते तुम

यूं अंधेरे में सिमट कर न डूबती जिंदगी

फिर उजालों‌ में नहाकर जगमगाती जिंदगी

तो कुछ दिन‌ जिंदगी के गीत गाती जिंदगी

मन तरसता है फिर बन‌ जाओ सबेरे की किरन

काश! पहले की तरह फिर मुस्कुरा दो तुम 

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