शिक्षा और परीक्षा पर निबंध | hindi niband on siksha| School essay 2021| UPSC essay 2021

शिक्षा और परीक्षा पर निबंध|UPSC essay|School essay

_राजन  पाठक 

शिक्षा और परीक्षा पर निबंध
शिक्षा और परीक्षा
Sketch By Raj Pathak
@essaylikhnewala  

जिस प्रकार जीवन जीने के लिए सांसो की जरूरत होती है उसी प्रकार उसी जीवन को आदर्श और पथ प्रदर्शित करने के लिए शिक्षा का सर्वाधिक महत्व है। शिक्षा वह प्रकाश स्तम्भ है,जो मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का परिचायक है । शिक्षा हमें सुख-शांति प्रदान करने का साधन है। यह एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे व्यक्ति औपचारिक और अनौपचारिक व अन्य स्थितियों में अनेक बातें सीखता है, जो कि जीवन में नए प्रयोग, व्यवहार में परिवर्तन लाने में सहायक होता है। एक शिक्षित विहीन मनुष्य को पशु के समान कहा गया है। कई धार्मिक ग्रंथों में भी शिक्षा का विशेष महत्व बताया गया है- “सा विद्या विमुक्ते”। अर्थात शिक्षा या विद्या ही एक मात्र ऐसा साधन है जो हमें अनेक बंधनों से मुक्त करती है और हमारा हर पहलू पर विस्तार कर हमें सदमार्ग दिखती है।


आप, शिक्षा और परीक्षा पर निबंध पढ़ रहे है 

शिक्षा का अर्थ  केवल किताबों की पढ़ाई ही नहीं होती, बल्कि जीवन के अनेक मोड़ पर आपको मिली हुई सीख भी "शिक्षा" हो सकती है।
बेहतर शिक्षा और परीक्षा प्रणाली सभी के लिए जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है। यह हम में न केवल आत्मविश्वास विकसित करते हैं साथ ही हमारे व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायता करती है। यदि परीक्षा ना हो तो शायद हम कभी अपनी कमियों के बारे में कभी जान ही नहीं पाएं।
शिक्षा रूपी धन ही एक मात्र ऐसा धन है जिसे ना तो कोई चुरा सकता है और ना ही कोई छीन सकता है। यह एक मात्र ऐसा धन है जो बाँटने पर कम नहीं होता, बल्कि इसके विपरीत बढ़ता ही जाता है। यह मस्तिष्क को सकारात्मक की ओर मोड़ती है और सभी मानसिक और नकारात्मक विचारधाराओं को हटाती है।
 शिक्षा और परीक्षा दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो परीक्षाएँ शिक्षा पद्धति का आवश्यक अंग है | विद्यार्थी की योग्यता को नापने के लिए यह एक महत्वपूर्ण साधन है | 
"परीक्षा’ शब्द - दिखने में यह जितना छोटा है, इसका महत्व उससे कहीं अधिक होता है। जिस प्रकार किसी भी कार्य को किये जाने के बाद उसका परीक्षण करना महत्वपूर्ण होता है उसी प्रकार शिक्षा ग्रहण करने के बाद उसका भी परीक्षण उतना ही जरूरी होता है। परीक्षा का महत्व किसी की सफलता से नहीं बल्कि यह उस व्यक्ति विशेष के अंदर में छुपी उसकी काबिलियत को निखरना है।
शिक्षा की जड़ कड़वी है पर उसके फल मीठे है।-अरस्तु

परीक्षा का भय!! आखिर क्यों?

आज परीक्षा अधिकतर विद्यार्थियों के लिए एक भय की वजह बन गई है। आज परीक्षा एक हौवा बनकर विद्यार्थियों के मन-मप्तिष्क पर छा जाती है। परीक्षा के आते ही विद्यार्थियों के आंखों की नींद गयाब हो जाती है, सब मनोरंजन के साधन भी छूट जाते हैं,क्यों ?क्योंकि परीक्षा आ गई है!! कईयों का तो यही लक्ष्य होता है कि परीक्षा में कैसे भी करके पास हो जाएं बस। नहीं तो अगर पास नही हुए तो समाज क्या कहेगा, नौकरी नहीं मिलेगी..... औऱ भी ना जाने कितने प्रश्न विद्यार्थियों के दिमाग चलने लगते है। पढ़ते-पढ़ते आंखें थकान के कारण बोझिल हो जाती हैं लेकिन फिर भी लगे पड़े हैं रटने में,क्यों? क्योंकि डर परीक्षा का नहीं फेल होने का है।

आप, शिक्षा और परीक्षा पर निबंध पढ़ रहे है 

शिक्षा और परीक्षा पर निबंध
पढ़ते -पढ़ते  थक जाते  बच्चे 
Sketch by @vishalverma_0_0_
@essaylikhnewala  
परीक्षा के इसी भय के  कारण बाजार में कितनों की बंद दुकानें भी अच्छी खासी चलने लगती हैं। उनके पास वो सभी चीजें आ जाती हैं जिसके खाने से परीक्षार्थियों का दिमाग ज्यादा तेज चलने लगता है। मसलन क्या खाएं, कितना सोएं, क्या डाइट्स लिए जाएं, किन किन किताबों की मदद ली जाए यह सब जानकारियां इंटरनेट पर ट्रेंडिंग में आ जाती हैं। अलग-अलग कोचिंग संस्थान भी 100% अंक दिलाने जैसा दावा कर अपने संस्थानों के प्रचार प्रसार में लग जाते हैं। अखबारों के पन्ने और न्यूज चैनल्स में एक्स्पर्ट अपनी रायों की बौछार करना शुरू कर देते हैं। आखिर परीक्षा का इतना भयानक दृश्य क्यों?


आधुनिक शिक्षा और परीक्षा प्रणाली

शिक्षा और परीक्षा पर निबंध
परीक्षा के लिए शिक्षा ??
Sketch by Shikha Pandey
@essaylikhnewala  
पहले के समय की शिक्षा प्रणाली आज के अपेक्षा काफी अलग और कठिन थी। सभी जातियों को उनके इच्छा अनुसार शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन अब इसमें काफी हद तक सुधार हुआ है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में कुछ कमियां भी हैं, परन्तु कमियां तो हर व्यवस्था में कुछ न कुछ तो रहती ही है। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों  के लिए परीक्षा का परिणाम एक इनाम की तरह होता है। यदि परीक्षाएँ न होती तो विद्यार्थों में शिक्षा में परिश्रम का उत्साह शायद ही उत्पन्न होता। कितने तो यह भी कहते हैं कि परीक्षा के कारण बच्चों पर अनावश्यक दवाब आता है अतः परीक्षाएँ नहीं होनी चाहिए | पर इस दवाब के सकारात्मक प्रभाव को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। विद्यार्थिओं में अपार योग्यता छुपी होती है, उस योग्यता को बाहर लाने के लिए यह आवश्यक है कि वे मेहनत करें | 
आधुनिक शिक्षा का काम जंगलों को काटना नहीं, रेगिस्तान को सींचना है। - सी एस लेविस
परीक्षा का दवाब बच्चों से परिश्रम करवाता है | अतः इस दबाव का भी कहीं ना कहीं महत्व है। इससे विद्यार्थियों की योग्यताएँ विकसित होती हैं | परीक्षा में एक दूसरे के अंक देख कर अन्य विद्यार्थियों को ज्यादा अंक लाने की चाह भी बढ़ने लगती है जिससे वो उनके मन में परीक्षा के प्रति उत्साह बढ़ता है।

क्या शिक्षा परीक्षा से ही तौली जा सकती है?

शिक्षा  और  परीक्षा  पर  निबंध
परीक्षा के लिए शिक्षा ??
Sketch by Shikha Pandey
@essaylikhnewala  
आज के आधुनिक शिक्षा तकनीकी में शिक्षा से ज्यादा परीक्षा को महत्व दिया जाता है। आज ऐसी स्थिति है कि शिक्षा है तभी परीक्षा नहीं है बल्कि परीक्षा है तभी शिक्षा है। परीक्षा होनी चाहिए और आवश्यक भी है परन्तु हर स्थिति तो परीक्षा के लिए तो समान नहीं हो सकती। आज पूरा विश्व कोरोना नामक वैश्विक महामारी से लड़ रहा है। परन्तु फिर भी आज कई विश्वविद्यालय और कॉलेज ऐसे भी हैं जो परीक्षा करना चाहते हैं। और वहीं विद्यार्थी वर्ग का कहना है कि वो परीक्षा देने से भी नहीं कतरा रहे, अपितु उन्हें अपनी जान को खतरा दिख रहा है, उनके अनुसार जान है तो जहांन है, जो की देखा जाए तो कहीं ना कहीं सत्य ही है। और वे अभी इस महामारी के दौरान परीक्षा देना नही चाहते।

आप, शिक्षा और परीक्षा पर निबंध पढ़ रहे है  

आज ऐसा वक़्त भी आ गया है जब शिक्षा को परीक्षा से तौला जा रहा है। ऐसे समय में भी परीक्षा का कराया जाना कहाँ तक उचित है? हां यह तो है कि शिक्षा में परीक्षा अत्यंत ही महत्वपूर्ण है परन्तु क्या आज परीक्षा किसी विद्यार्थी के जीवन से भी बढ़कर हो सकती है? 
शिक्षा और परीक्षा पर निबंध
लखनऊ  विश्वविद्यालय  के छात्रों 
(ऋषभ मिश्रा और  अतुल सिंह ) द्वारा
किया गया   सर्वेक्षण 
ऐसा नहीं कि यहाँ हम परीक्षा का विरोध कर रहे हैं नहीं, बल्कि यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी स्थिति में भी परीक्षा कराया जाना शायद उचित नहीं। विद्यर्थियों के अनुसार इसके और भी विकल्प हैं। कोरोना महामारी के सम्पति तक परीक्षा को स्थगित किया जा सकता है, उसके बाद भी परीक्षा संपन्न कराई जा सकती है  तथा और भी अन्य विकल्प भी हैं। विद्यर्थियों का मूल्यांकन करने के लिए और अन्य भी तरीके हैं जो कि ऐसी स्थिति में अपनाए जा सकते हैं।
आज सोशल मीडिया पर भी इस बात को लेकर छात्रों में नाराज़गी दिखाई दे रही। कई तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री और राज्य सरकार को टैग करते हुए यह भी लिख रहे -"कफ़न में डिग्री लेकर ऊपर जाएंगे क्या।मौत के बाद हमे अफसर बनाएंगे क्या।" और स्टूडेंट लाइफ मैटर्स जैसे हैशटैग का प्रयोग कर रहे हैं। 
आज देखा जाए तो  शिक्षा कहीं न कहीं परीक्षा तक ही सीमित रह गई है। या फिर कहें शिक्षा केवल परीक्षा के लिए रह गई है। और ऐसा होना शिक्षा व्यवस्था के लिए कदापि उचित नहीं है। शिक्षा और परीक्षा दोनों ही आवश्यक है । अतः इन दोनों का आपस में संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

Thank You for Reading.

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2 comments:

Unknown said...

Very well written This topic actually needs much more attention than other because future creativity starts with it.. Well done

Republicblogger said...

OSM💙

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Thank you for reading. Stay tuned for more writeups.