Elephant's death /Hindi poem

 Elephant's death /Hindi poem

मृत मम्मा एलिफेंट
   :- आशीष पाठक
Elephant's death /Hindi poem
मृत मम्मा एलिफेंट
Sketched by 
@rohitbahekar589
@essaylikhnewala

इंसान ने आज फिर से इंसानियत खो दिया,
जिसके अंजाम से संसार सारा रो दिया।
माना कि वो भूखी थी, तरसती इक निवाला को,
खाना देकर उसका अस्तित्व ही तूने खो दिया।
इंसान ने आज फिर से इंसानियत खो दिया।।

उसने तो प्यार किया तुझको, बेदर्द ने मार दिया उसको।
फल देकर जहर दिया उसको, तूने कितना दर्द दिया उसको।
तुम न समझे माँ की पीड़ा, बच्चे संग खत्म किया उसको।


तुम उसका दर्द न जान सके, तुम उसको न पहचान सके।
देकर खाना तुम भूल गए, जीवन से उसके खेल गए।
क्यों मार दिया उसको तुमने, जो जग में आने ही वाला था।
क्या तुमने देखा उस माँ को, जो दिल का कितना अच्छा था।
हाथी भी कितना सच्चा था, उसके भी पेट मे बच्चा था।

दुनियां में आने से पहले, 
तुमने तो उसको मार दिया, 
इंसान नही तू राछस है, 
तूने कितना घिनोना काम किया।
तुझे प्यार नहीं करना आया, 
सत्कार नही करना आया।

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चलो फिर से आज एक काम करते है, 
थोड़ा सा ही सही पर कुछ अच्छा काम करते है।
करँगे दिल से सेवा जानवर की, उनको अपना मानेंगे,

कुछ इंसानो ने तो इंसानियत बेच खाई है,
इतना दर्द देते हुए उनको 
थोड़ी भी दया नही आई है।
अरे तुम तो इंसान हो, 
तो शैतान सा काम क्यो करते हो।
किसी की भूख मिटा कर 
तुम उसकी हत्या क्यो करते हो।
चलो माना तुम्हें हांथी पर दया नही आई, 
अरे उसके बच्चे को तो देखा होता।
जो जग में आने वाला था,
उसके बारे में तो कुछ सोचा होता।
पढ़ लिखकर भी तुम तो जाहिल हो,
इंसान नहीं तुम काहिल हो।
क्या शर्म नहीं आयी तुमको, 
जो मार दिया माँ संग बच्चे को।

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तुमसे अच्छा तो हाँथी था, 
जो दर्द नही दिया तुमको,
अरे, तुमने तो उसको मारा था, 
फिर भी कुछ नही किया तूमको।
इंसान नही होकर भी वो, 
तुमसे तो कितना अच्छा था।
जंगल मे कुछ नही मिला उसको,
 तो भूख मिटाने आया था।
फल भी दिखने में तो अनानास जैसे था,
जो दे रहा था उसको,
 वो भी तो इंसान जैसा था।
पर इंसान के पीछे छुपा था जो, 
माँ देख नही पाई थी,
फल खाने को दिया मगर उसको तो बहुत रुलाई थी।
Elephant's death /Hindi poem
मृत मम्मा एलिफेंट
Sketched by @Khusi_sakshi

@essaylikhnewala
क्या करे माँ तो माँ होती है, 
चाहे वो इंसान की हो या जानवर की।
वो बेचारी फल देख कर थोड़ा सा तो ललचाई होगी,।
भूख को मिटाने को वो फिर खाने को आई होगी।

फल देख कर वो खाने को स्वीकार किया होगा,
पर उसे क्या पता था कि, इंसानो में कहीं यमराज खड़ा होगा।

इंसानो की गलती ने एक माँ और उसके बच्चे के जान ले ली,
ये इंसान नहीं कोई और है जो एसे काम का पहचान दे दी।


चलो ठीक है, पर तुम जानवरो का दर्द नही समझ पाओगे,
तुम्हारे काम से तुम इंसान क्या  जानवर भी नही कहलाओगे।
माना कि तुम  जानवर को सम्मान नहीं दे सकते,
तो कम से कम उनका कभी अपमान मत करो।
ये भी हमारी तरह प्रकृति के अंग है,
तुम उनको मार कर उनको परेशान मत करो।


         Thank You for Reading मृत मम्मा एलिफेंट


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5 comments:

Explorer ankit said...

Amazing 🙏

Unknown said...

Loved it man. U nailed this poem.😍
Naam aise hi roshan kr.

Unknown said...

Nice poem

Unknown said...

Excellent... Keep it up. God bless you.

Unknown said...

Beautifully written.!!!!

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Thank you for reading. Stay tuned for more writeups.