नारी सशक्तिकरण् पर कविता

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नारी सशक्तिकरण् पर कविता 

किसी समाज के विकास का आकलन उस समाज की स्त्रियों द्वारा प्राप्त किए गए विकास से किया जा सकता है। नारी सदैव ही पूजनीय होती है, उसे अबला समझना बहुत बड़ी भूल है। आज जब इस दौर में हम अपने देश को आत्म निर्भर बनने का सपना देख रहे है, उस सपने को हासिल करने के लिए हमें अपने देश की नारियों को आत्म निर्भर बनाना होगा, उनका साशक्ती कारण बहुत आवश्यक है।

नारी सशक्तिकरण्
Pic by @mr_photgrapher2609

-आशीष पाठक

नारी सशक्तिकरण्

बेटी दी है रब ने, बेटी का हिसाब क्या देते,
सवाल सारे गलत थे, तो तुम जबाव क्या देते।
आज जिसकी आवाज़ को तुमने, कदमों तले दबा दिया,
रुख मोड़ दे आँधी का वो , तुम अधिकार तो दिए होते ।।
नारी की जिस शक्ति का, शायद तुमको आभास  नहीं,
नारी बिन इस दुनिया मे जीवन  कोई भी प्रकाश नहीं।
बिन नारी संसार मे इस, न हम होंगे, न तुम होगे,
नारी है तो सब कुछ है ,शायद तुझको विश्वास नहीं।।

नारी सशक्तिकरण् पर  कविता

नारी से हम-तुम बने, इस सृष्टि में जीवन खिले,
इस दुःख भरे संसार मे, फिर प्यार की कलियाँ खिले।
इतिहास को भी रच दिया , कुछ इस तरह के काम कर,
जिसके कदम धरती ही न, आकाश में भी तुझको मिले।।
अपमान मत कर तू नारियों का, जिनके वजह से तू चलता है,
नारी ने तुझको जन्मा है, नारी के गोद मे तू पलता है।।
 @essaylikhnewala

मत सोच ये की नारी को, आगे बढ़ना न आता है,
मत सोच ये की नारी को दुःख से लड़ना न आता है।
नारी ने जब भी जन्म लिया, इस अंधकार के जीवन मे,
हर मुश्किल से उसको लड़ना, और शंघर्षो से टकराना आता है।।
जिसने नारी को प्यार दिया, उसका आदर सम्मान हुआ,
जिसने नारी को अबला समझा , फिर उसका भी तिरष्कार हुआ।
जिसने नारी को उपभोग समझकर, उसका सिर्फ उपयोग किया,
तो उसके प्रकाश के जीवन में, काली रात सा अंधकार हुआ।।

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आखिर इस आधुनिक जीवन में, येसा क्यो समझा जाता है,
लड़का और लड़की में फिर क्यो भेदभाव किया जाता है।
आखिर लोगों के मन मे , सामान्यता क्यो न आती है,
लड़का जो हुआ तो खुश होते , लड़की को मारा जाता है।।
नारी सशक्तिकरण् के नारों ने सबको फिर से बतलाया है,
आज मेरे मन मे फिर, इक वही सवाल उठाया है।
वेदों और पुराणो में जिसकी माहिमां की गाते है
अब कोख में जब आती बेटी, तो उसकी हत्या करवाते है।।
फिर से आज इक बेटी को , पन्नी में कर के फेका है,
लोगो ने आज इस दुनिया मे, इंसानियत को फिर से बेचा है।
किया है पाप जो तुमनें, भुगतना तुमको भी होगा,
तेरे इस कुकर्म के बदले में मरना तुमको भी होगा।।

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अंतिम पंक्ति :- 

धन्यवाद इस मंच का जिसने मुझे मौका दिया,
नारी के कुछ जीवन को, कुछ शब्द में बतला दिया।
नारी तो वो रत्न है जिसकी, कीमत कोई ना लगा पाया,
कविता सुनी है आप सब ने जिसे आशीष ने है बतलाया।।
अपमान मत कर तू नारियों का, जिनके वजह से तू चलता है,
नारी ने तुझको जन्मा है, नारी के गोद मे तू पलता है।।

 
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@essaylikhnewala

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