आत्मनिर्भर भारत पर निबंध | atamnirbhar bharat pe nibandh| hindi essays| Cbse essays| UPSC essays|

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध | hindi essays|

-राजन  पाठक 


आत्मनिर्भर भारत पर निबंध
DRDO द्वारा  बनाई गई एंटी- सॅटॅलाइट  मिसाइल 
"पराधीन सपनेहुँ सुख नहीं।" 
दूसरे पर निर्भर रहकर व्यक्ति अपने जीवन के सुखों का वास्तविक उपभोग नहीं कर सकता।"
आत्मनिर्भर का अर्थ है अपने किसी भी जरूरत के लिए किसी अन्य पर निर्भर न होकर सिर्फ खुद पर निर्भर होना। फिर भी पूर्ण आत्मनिर्भरता असम्भव सा है। पर कोशिश करने में क्या जाता है?
कोई देश अगर अपने किसी भी जरूरत के लिए किसी और पर निर्भर नहीं होता है तो वह देश सभी देशों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह हमारा सपना ही नहीं हम सब की जिम्मेदारी भी है कि 21वीं सदी भारत की हो ,और इसका मार्ग एक ही है -आत्मनिर्भर भारत।
आत्मनिर्भरता सिर्फ आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता, ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है। आत्मनिर्भरता आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होती है, जिसके कारण सफलता की राह आसान हो जाती है ।

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एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में हम एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। आज पूरा विश्व कोरोना रूपी वैश्विक महामारी से लड़ रहा है। यही वक़्त है जब हम अपने इस आपदा के वक़्त को एक अवसर में बदल सकते हैं। जब कोरोना संकट शुरू हुआ तो भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी ,N-95 मास्क का भारत में नाम मात्र उत्पादन होता था । आज यह स्थिति है कि भारत में ही हर दिन 2 लाख पीपीई और 2 लाख N-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। यह सिर्फ इसलिए हो पाया क्योंकि भारत ने आपदा को अवसर में बदल दिया।
आज विश्व में आत्मनिर्भर के मायने पूरी तरह से बदल गए हैं। भारत की संस्कृति और संस्कार उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंबकम है।
भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख ,सहयोग और शांति की चिंता होती है। भारत की प्रगति में हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है।भारत के लक्ष्यों और कार्यो का प्रभाव विश्व पर जरूर पड़ता है। 
आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं है कि हम किसी देश के सामान का आयात बन्द कर दें। इसका मतलब यह है की हमारा खुद का माल इतना सस्ता और अच्छा हो की विदेशी  समान  को छोङकर लोग स्वयं ही उसे खरीद लें।

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जिंदगी औऱ मौत के बीच जूझ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई जिंदिगी की आशा लेकर पहुँचती हैं।स्वाभाविक है कि हमे गर्व होगा कि हमारे देश भारत ने दुनिया को मौत से बचाने का यह बेहतरीन प्रयास किया है,और सैदव ऐसे ही पूरे विश्व के प्रत्येक देश को एक जिम्मेदार देश बनने का संदेश देता रहेगा।
यह भारत में शीर्ष कुछ आयातित उत्पाद है जो कि भारत भारी मात्रा में आयात करता है: तेल,कीमती पत्थर ,इलेक्ट्रॉनिक्स ,भारी मशीनरी,जैविक रसायन, प्लास्टिक,पशु और वनस्पति तेल,लोहा और इस्पात, आदि।
अगर भारत आत्मनिर्भर होगा तो इन सब उत्पादों को    आयात करने का खर्च बचा सकता है।
आत्मनिर्भर भारत पर निबंध
HAL द्वारा  निर्मित  हेलीकॉप्टर
Def Expo, लखनऊ
Pic by Ankit Patel
आत्मनिर्भरता का मतलब देश और दुनिया में गिङगिङा कर अपना माल बेचना नहीं है। इसका मतलब है की अपनी क्वालिटी और ब्रांडिंग इस स्तर की करनी है की लोग "बाई च्वाईस" उसे खरीदें। आत्मनिर्भरता का मजाक उङाना स्वयं अपने वजूद का मजाक उङाना है।आत्मनिर्भर होना हर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का स्वप्न होना ही चाहिए।
आज दुनिया को भी यह विश्वास है कि भारत की उन्नति पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी है। यह उन्नति तभी संभव है जब हम एक संकल्प लेकर अपने इस भारत को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चलाएं।
आत्मनिर्भर भारत की भव्य इमारत 5 खंभों इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी ड्रिवन व्यवस्था, वाइब्रेंट डेमोग्राफी, डिमांड पर खड़ी है। डिमांड बढ़ाने और इसे पूरा करने के लिए सप्लाई चेन के हर स्टेकहोल्डर का सशक्त होना जरूरी है।
"आत्मनिर्भर भारत अभियान" के तहत हाल में ही हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज की घोषणा की है। यह पैकेज भारत की जीडीपी का लगभग 10% है। यह पैकेज आत्मनिर्भर भारत के लघु , सूक्ष्म व मध्यम उद्योगों को एक साहस और ताकत देगी।

आत्मनिर्भरता से लाभ:

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध
भारतीय  रूपया
Pic by @mr_photgrapher2609

आत्मनिर्भर होने से हमारे देश को अनेकों लाभ हैं। इससे पहला लाभ तो आयात में कमी और निर्यात में वृध्दि होगी ,जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार  होगा। हमारे देश की अन्य देशों से व्यापार के साथ साथ मित्रता भी बढ़ेगी। इससे  पूरे विश्व में एक भाईचारे का संदेश जाएगा। आत्मनिर्भर होने से हमारे देश में उत्पादन बढेगा । जिससे जो बड़ी बड़ी मशीनें और हथियार हम दूसरे देश से खरीदते हैं वो हमें खरीदने की जरूरत नहीं होगी जिसके चलते हमारे देश की सुरक्षा बढ़ेगी। हमारे देश को दुनिया में एक विकसित देश के रूप में देखा जाएगा, और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी।देश के आत्मनिर्भर बनने से देश में निवेश अधिक होगा जिससे हमारे देश में बेरोजगारी में भी कमी होगी। डॉलर के मुकाबले  रूपया   होगा।'

 कुछ बाधाएँ और उनके हल :-

देश को आत्मनिर्भर बनाने में अनेक समस्याएँ है । इन समस्याओं पर हमें काम कर अपने इस लक्ष्य "आत्मनिर्भर भारत" को सफल बनाना है। 
जैसे कि हमारे  देश में मजदूर वर्ग का बहुत ही महत्व है। उनके कार्यो को और भी बेहतरीन बनाने के लिए देश में मजदूरों को प्रशिक्षित करने की अत्यंत आवश्यक है। उनके सुरक्षा तथा उनके उनकी कानूनी बाधाओं को भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
देश के उज्ज्वल भविष्य को बचपन से ही किसी विशेष क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जिससे उन्हें अपने भविष्य की चिंता ना हो औऱ वो अपने प्रशिक्षण क्षेत्र अपने अपनी रुचि को निखार सकें।

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जैसा कि अभी इस आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत ही है तो लोगों की इसमे रुचि बढ़ाने के लिए स्वदेशी वस्तुओं को सस्ती करनी चाहिए जिससे लोगों का प्रोत्साहन बढ़े। देश में उत्पाद बढ़ाने के लिए विद्युतीकरण में बढ़ोतरी की भी आवश्यकता है जिससे हमारे देश की कंपनियों को अपने कार्यों में कोई बाधाएँ न आए।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित विद्युत आपुर्ति को सुनिश्चित करना होगा जिससे ग्रामीण क्षेत्र में भी लघु व सूक्ष्म उद्योग को भी बढ़ाया जा सके।
जितना जरूरी है देश के कोने में स्वदेशी उत्पाद को पहुँचना, उससे कहीं ज्यादा आवश्यक है देश के लोगो को स्वदेशी उत्पादों की पहचान कराना। देश के सभी उत्पादों पर एक स्वदेशी मोनोग्राम या लोगो होना चाहिए, जिससे लोगों को अपने देश में बनी हुई चीजों की पहचान हो सके।

हर एक भारतवासी का कर्तव्य:-

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध
 लोकल के लिए ‘वोकल’
Pic by Tushar Pandey
आज हम सभी भारतवासी का यह कर्तव्य है कि हम अपने लोकल के लिए ‘वोकल’ बने और न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स की खरीददारी करें, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करें।
आज हमारे पास साधन है, सामर्थ है , दुनिया के बेहतरीन टैलेंट है , तो हमे किस चीज का इंतजार है?
यदि हम किसी का सहारा लेना हैं, तो हमें अपने अन्दर छिपी योग्यता, अपने मनोबल और अपने आत्मविश्वास का सहारा लेना है क्योंकि उससे व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है और आत्मनिर्भर व्यक्ति के लिए सफलता के दरवाजे हमेशा खुले होते हैं ।
आत्मनिर्भर का मतलब यह नहीं की आप भीखमंगो की तरह अपने खाते में रुपये लेने का आग्रह करें।
इसका मतलब यह है की आप अपना उद्योग सरकार की मदद से लगाएं और धीरे-धीरे अपने पैरो पर खङे होते हुए सरकार का पैसा वापस कर दें।
कहते हैं “भगवान भी उन्ही की सहायता करते हैं जो अपने आप के सहायक होते हैं ”। पूरी धरा पर मनुष्य ही ऐसा योनि है जो हर असम्भव को सम्भव कर सकता है फिर यह तो एक कोशिश करने की बात है। आओ आज हम सभी एक जुट होकर अपने इस स्वभिमान भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें।


twitter: atamnirbhar bharat
@essaylikhnewala
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