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संघर्ष

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कवि: विमर्श 

ज़िन्दगी में एक मुकाम आया है,
मेहनत का फल नज़र आया है,
दिल पर लगती है बात जब लोग कहते है
तूने ये सब किस्मत से पाया है,
अब उन्हें कौन बताये
मैंने रातों की नींद खोयी थी,
एक वक़्त ऐसा भी था,
 जब ज़िन्दगी मेरे साथ बैठ कर रोइ थी।
संग्रश की आग  में निरंतर जलता करा हु में ,
उमीद की किरण का रोज़ पीछा करता रहा हु मै ,
इसी  किरण ने सफलता के सूरज तक पहुँचाया है ,
मेरे हर दुःख के अंधकार  को मिटाया है,
    संगर्ष का हाथ थामे चला था, आशा  के पथ पर
न जाने  कष्टों  के कितने ही बाण खये है जीवन रूपी रथ पर
इंतेज़ार किया, मैंने निरंतर प्रयाश किया
सिर्फ संगर्ष से ही प्यार किया
आज वो पल आया है ,इसने मुझे मेरा प्यार लौटाया है
मुझे मेहनत का फल नज़र आया है। 
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